Bermuda Triangle बरमूडा ट्रायंगल

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उत्तरी अन्ध महासागर यानी Atlantic Sea के पश्चिमी भाग में स्थित बरमूडा ट्रायंगल अमेरिका के मियामी, प्यूर्टोरिको और बरमूडा आइलैंड के मध्य लगभग  500,000 वर्ग मील में फैला ऐसा जलीय इलाक़ा है जो नाविकों हवाई यात्रियों और उनके जहाज़ों को लील लेने के लिए बदनाम है।   कुछ मानतें हैं की बरमूडा ट्रायंगल में कुछ पारलौकिक शक्तियाँ हैं जो चीज़ों को अपनी ओर खींच लेतीं हैं , कुछ का कहना है बरमूडा ट्रायंगल एक वर्म होल है एक पोर्टल एक दरवाज़ा है जिसका दूसरा छोर या तो सुदूर ब्रह्माण्ड में खुलता है या तो Parellel Universe में जिसे हम सामानांतर आयाम कहते हैं।  कुछ का ये सोचना है की ये एक सीक्रेट एलियन बेस है जो अमेरिकी सरकार की निगरानी में है जिसे वह दुनिया की नज़रों से छुपा के इस्तेमाल कर रही है।

 

जिस किसी ने बरमूडा ट्रायंगल का नाम सुना है उसने यही सुना है की वहां पहुँचते ही दिशासूचक कंपास का कांटा पूरी गति से गोल गोल घूमने लगता है रेडियो से लेकर जो भी अत्याधुनिक संचार के साधन हैं वह ठप्प पड़ जाते है।  समंदर में तैरने वाले ज़हाज़ का नाविक हो या हवा में गोते लगाने वाले किसी फाइटर प्लेन का पायलट , बरमूडा ट्रायंगल में पहुँचने के बाद उनका दिशा ज्ञान भ्रष्ट हो जाता है।

पर आपने कभी सोचा है की अगर बरमूडा ट्रायंगल इतना जानलेवा क्षेत्र है तो उसका नाम किसी भी नक़्शे या ओफिशिअल मैप  पे क्यों नज़र नहीं आता ?

इतनी दुर्घटनाओं के बाद भी इसे क्यों रिस्ट्रिक्टेड जोन या प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित नहीं किया जाता ?

क्या आधुनिक विज्ञान इन जहाज़ों के गायब हो जाने के पीछे के रहस्यों से पर्दा उठा पायेगा ?

BermudaTriangle के Secrets से जुड़े इन्हीं सवालों का जवाब हम आज ढूंढेंगे तो बने रहिये हमारे साथ BermudaTriangle के इस बेहद दिलचस्प सफर के अंत तक

The Origin

ये उन दिनों की बात है जब आम लोगों में मिआमी प्यूर्टो रीको और बरमूडा आइलैंड के बीच एक रहस्यमयी इलाके को लेकर कौतुहल सा बन गया था।  लगातार कई दशकों से इस इलाके में सैकड़ों जहाज़ों के गुम होने की खबरें आम थी। 1950 में मिआमी हेराल्ड नामक एक अख़बार ने पहली बार इस इलाके में हो रही रहस्यमयी गुमशुदगियों के बारे में छापा।  ठीक २ साल बाद जॉर्ज एक्स सैंड ने FATE मैगज़ीन में पहली बार प्रभावित क्षेत्र के तिभुजाकर होने की ओर संकेत किये। सन 1962 में Argosy नामक उस वक़्त की एक फेमस PulpFiction मैगज़ीन में विन्सेंट गेडिस का लेख प्रकाशित हुआ। जिससे इस रहस्यमयी और तथाकथिक खतरनाक त्रिभुजाकार समुद्री क्षेत्र को नाम मिलने वाला था। वो शख्स गेडिस ही थे जिन्होंने इस क्षेत्र में लगातार गुम हो रहे जहाज़ों के एक अजीबोगरीब पैटर्न और पारलौकिक कारणों पर रौशनी डाली थी। विन्सेंट गेडिस ने अपने लेख का शीर्षक रखा था “The Deadly BermudaTriangle”. फिर क्या था लोगों में ये नाम काफी चर्चित हो गया।  लोगों के अंदर बरमूडा ट्रायंगल को लेकर जिज्ञासा बढ़ती ही गयी जो आज तक कायम है। तो आखिर ऐसा क्या घटा था बरमूडा ट्रायंगल में जिसकी गुत्थी मॉडर्न युग का साइंस भी नहीं सुलझा पाया ?

Bermuda Triangle Disappearances

Ellen Austin Ship Mystery

19 वीं सदी में Ellen Austin नामक एक अमेरिकी जहाज़ था जो 210 फ़ीट लम्बा और 1800 टन वज़नी था।  Ellen Austin का एक तय समुद्री रास्ता था यह जहाज़ लंदन से न्यूयोर्क अटलांटिक महासागर में बरमूडा ट्रायंगल क्षेत्र से होता हुआ जाता था। सन 1881 में ऐसी ही एक समुद्री यात्रा के दौरान  Ellen Austin का सामना हुआ,एक तेज़ी से तैरते हुए जहाज़ से।  जब कप्तान ने गौर से देखा तो पाया उस तेज़ी से बढ़ते जहाज़ में कोई भी नहीं था।  उस वक़्त Ellen Austin बरमूडा ट्रायंगल की सीमा के ज़द में था।  कप्तान ने बिना देर किये अपने जहाज़ से उस बेनाम वीरान जहाज़ पर अपने क्रू के सबसे बेस्ट नाविकों को भेजा।  क्रू मेंबर्स ने भी ठीक तरह से अंदर बाहर देख ज़हाज़ पर किसी के भी न होने की पुष्टि की।  कुछ दूर आगे चलने पर Ellen Austin और अब उसके बराबर पे चल रही बेनाम शिप का सामना हुआ समुद्री तूफ़ान से।  बताया जाता है की तूफ़ान इतना तेज़ था की दोनों जहाज़ अलग हो गए। Ellen Austin के कप्तान ने तुरंत सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया ।  बहुत खोजने पर उन्हें वह बेनामी जहाज़ समुद्र में फिर दिखा पर उस पर भेजे गए बेड़े का एक भी क्रू मेंबर नहीं था। जहाज़ में एक भी शख्स का शव नहीं मिला। Ellen Austin के कप्तान ने एक बार फिर अपने जहाज़ से कुछ आदमी उस बेनामी जहाज़ में भेजे। क्रू मेंबर सवार हुए और यात्रा तय शुदा शुरू हुई।  अचानक मौसम फिर ख़राब हुआ और एक बार फिर बेनामी जहाज़ नज़रों से ओझल हो गया।

इस बार न तो क्रू मेंबर मिले और न ही जहाज़। Ellen Austin के कप्तान ने उस लापता जहाज़ और क्रू मेंबर्स को खोजने के लिए जो कोशिश की उसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की जहाज़ ने लंदन 5 दिसंबर 1880 को छोड़ा था और न्यूयोर्क 11 फ़रवरी 1881 को पहुंचे।  ये समुद्री मार्ग से लंदन से न्यूयोर्क पहुँचने में लगने वाले समय से काफी अधिक था। जो साफ़ दर्शाता है की Ellen Austin के कप्तान ने काफी वक़्त लापता क्रू मेंबर्स और उस रहस्यमयी जहाज को खोजने में लगा दिया था।  तो आखिर कहाँ गए वह नाविक और वह बेनाम रहस्यमयी जहाज़।  काफी खोजने पर भी न शव मिले न ही जहाज़ का मलबा।  आखिर कहाँ से आया था वह वीरान जहाज जिस पर जाने वाला कोई भी वापस न आ सका।  बरमूडा ट्रायंगल की इस बेहद डरावनी घटना ने कई सवाल खड़े किये थे ।  परग्रहियों और एलियंस पर विश्वास करने वालों ने तो इसके पीछे एलियंस का हाथ बताया था और बरमूडा ट्रायंगल पे एलियंस के बेस होने की आशंका तक व्यक्त कर दी थी ।  कोई भी वैज्ञानिक तर्क इस घटना को समझा नही पाया । उस वक़्त इस घटना को महज़ इत्तेफ़ाक़ इसलिए नहीं समझा जा सकता था क्योंकि एक दशक पूर्व ही सन 1872 में Mary Celeste नामक जहाज़ का भी यही हाल हुआ था।  लंदन से जेनोआ इटली की यात्रा पे निकला ये जहाज़ यात्रा शुरू करने के कुछ दिनों बाद ही समुद्र में अकेला तैरता मिला था बिना किसी क्रू मेंबर के।  वह भी सही सलामत बिना किसी क्षति के।   जो क़ीमती सामान जहाज़ पे था वह पूरा सुरक्षित था। इसलिए इस घटना के पीछे समुद्री लुटेरों का हाथ नहीं हो सकता।  गायब हुए क्रू मेंबर में जहाज़ का कप्तान बेंजामिन ब्रिग्स उनकी पत्नी और दो साल की बेटी  के अलावा ४ और क्रू मेंबर्स थे जो अलकोहल से भरे ड्रम ले जा रहे थे।  जब Mary Celeste जहाज़ मिला तो उस पर से 8 ड्रम अलकोहल गायब था बाकी पूरा सुरक्षित था। जहाज़ की डेक पे एक तलवार मिली बस।  कई लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था की बरमूडा ट्रायंगल में रहने वाले दैत्याकार ऑक्टोपस ने Mary Celeste के क्रू को लील लिया ।

USS Cyclops

सन 1918 अमेरिकी नेवी के सबसे बड़े ईंधन लाने ले जाने वाले जहाज़ों में से एक USS Cyclops अपनी यात्रा शुरू करता है।  ब्राज़ील से अमेरिका के बाल्टिमोर पोर्ट तक इस जहाज़ को बरमूडा ट्रायंगल से होते हुए जाना पड़ता है। जहाज़ पे 309 ट्रेंड क्रू मेंबर्स सवार होतें हैं और लगभग 10,800 टन मैग्नीज़ ओर लादा जाता है।  मौसम एक दम साफ़ USS Cyclops के कप्तान से US Navel Base संपर्क करता है।  कप्तान बोलता है “No trouble every thing is fine”. USS Cyclops द्वारा भेजा गया ये पहला और आखिरी मैसेज साबित होता है और जहाज़ 309 क्रू मेंबर्स और 10,800 टन मैग्नीज़ अयस्क के साथ बरमूडा ट्राइंगल से गायब हो जाता है।  न ही कोई “डिस्ट्रेस सिग्नल”, न कोई मलबा, न शव।  काफी गहन खोजी मिशंस चलाने के बाद भी USS Cyclops का कोई पता नहीं चलता।  ये अमेरिका के नेवी के इतिहास की सबसे बड़ी हानि थी जिसमे उसने एक साथ ३०० से अधिक लोगों को खो दिया।

कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिल पाया इस दुर्घटना का।  इतनी बड़ा जहाज इतने सारे लोगों के साथ आखिर कैसे गुम हो सकता है ? क्या हाइली ट्रेंड लोगों में से किसी को भी मदद की गुहार लगाने वाला “डिस्ट्रेस सिग्नल” भेजने तक का समय नहीं मिला ?  सेटेलाइट इमेजिंग के आने के बाद भी आज तक इतने बड़े जहाज का मलबा क्यों नहीं मिल पाया ? क्या  बरमूडा ट्रायंगल USS Cyclops को निगल गया ?

इनके अलावा Carroll A. Deering नामक जहाज़ भी ठीक ऐसे ही बिना क्रू के पाया गया। सैकड़ों समुद्री जहाज इस रहस्मयी बरमूडा ट्रायंगल में कहीं गुम  हो गए और जो वापस मिले भी तो उनके क्रू मेंबर्स लापता थे। समुद्र पे तैरने वाले जहाज़ तो चलिए मान लेते हैं समुद्री तूफ़ान और हिंसक ऊँची लहरों की चपेट में आ सकते हैं।  लेकिन उन दर्जनों हवाई जहाज़ों का क्या जो बरमूडा ट्राइंगल के ऊपर उड़ते हुए गायब हो गए।  अगली घटना आपके रोंगटे खड़ी कर देगी।

फ्लाइट १९

5 December 1945 पांच अमेरिकी TBM Torpedo Bombers का बेड़ा रेगुलर एयर स्ट्राइक एक्सरसाइज की तैयारी करता है।  इस बेड़े को नाम दिया गया था Flight 19 .युद्धक विमानों के इस बेड़े को फोर्ट लॉडरडेल से पूर्वी दिशा में 140 मील, वहां से 73 मील उत्तर दिशा की ओर और फिर वापस फोर्ट लॉडरडेल 140 मील का सफर तय करना था। सही समय और सही साज़ो सामान के साथ Flight 19 का पूरा स्क्वाड्रन 2 बजकर 10 मिनट पर Naval Air Station फोर्ट लॉडरडेल फ्लोरिडा से टेक ऑफ कर गया।  ये हवाई एक्सरसाइज तीन घंटो की थी जिसमे युद्धक विमानों को फोर्ट लॉडरडेल से उड़ कर Hens एंड  Chickens Shoals नामक जगहों पर बॉम्बिंग प्रैक्टिस करनी थी  और वापस अपने Naval Air Base पे लैंड करना था। एक प्लेन को छोड़ कर बाकी सभी प्लेनस पे 3 Navy Men या फिर Marines थे।  क्रू के सारे मेंबर्स को हवाई यात्रा का 300 घंटों से अधिक का एक्सपीरियंस था।  Flight 19 के लीडर थे Lieutenant Charles C. Taylor एक अनुभवी पायलट जिन्होंने कई World War II ऑपरेशन्स में हिस्सा लिया था।

Flight 19 की एक्सरसाइज की शुरुवात काफी अच्छी रही 2:30 PM के तय समय पर Hens एंड  Chickens Shoals नामक जगहों पर प्रैक्टिस बम गिरा दिए गए।  पर  जैसे ही फ्लाइट १९ का स्क्वाड्रन उत्तरी दिशा की ओर मुड़ा नेविगेशनल सिस्टम में कुछ गड़बड़ी आ गयी।  कंपास सही दिशा नहीं दिखा रहा था। तभी अचानक बारिश शुरू हो गयी और फ्लाइट १९ के सामने बादल आ गए। पायलट ने रेडियो पे सन्देश भेजा ,”I don’t know where we are,”. “We must have got lost after that last turn.”  फ्लाइट के लीडर  Lieutenant Charles C. Taylor ने तब रेडियो पे कहा, “Both my compasses are out and I’m trying to find Ft. Lauderdale, Florida,”    फिर अचानक Taylor ने ये रेडियो सिग्नल भेजा, ” “We are entering white water, nothing seems right. We don’t know where we are, the water is green, no white.” और तभी उनका ईंधन समाप्त होने लगा जो आखिरी मैसेज था उससे साफ़ ज़ाहिर होता है की Taylor क्रैश लैंडिंग की तैयारी कर रहे थे। “All planes close up tight,” he said. “We’ll have to ditch unless landfall…when the first plane drops below ten gallons, we all go down together.” कुछ मिनट बाद रेडियो साइलेंट हो गया।

फोर्ड लॉडरडेल से तुरंत  2 PBM Mariner Flying Boats की एक खोजी टुकड़ी रवाना हुई।  ये एम्फीबियस प्लेन थे जो पानी की सतह पर तैर सकते थे।  आप जान के हैरत में पड़ जायेंगे की सर्च ऑपरेशन शुरू होने के कुछ मिनटों के भीतर ही इनमे से एक  Mariner राडार से गायब हो गया।  कई सर्च प्लेन्स और बोट्स की मदद से लाखों स्क्वायर मील की सघन खोज के बाद भी न तो Flight 19 का एक भी क्रू मेंबर मिला न कोई मलबा और न ही खोजी Mariner और उसका १३ सदस्यीय क्रू।  सबसे हैरानी की बात ये है की इतने ट्रेंड Marines और Naval क्रू को क्या इतना वक़्त भी नहीं मिला की वह एक डिस्ट्रेस सिग्नल भेज सकें।  Flight 19 Bermuda ट्रायंगल पर हुए सबसे मशहूर Disapperences में से एक है।   स्टीवन स्पीलबर्ग जैसे फ़िल्मकार ने इस किस्से को अपनी फिल्म क्लोज एनकाउंटर्स विथ द थर्ड काइंड में भी दिखाया था।  फिल्म में फ्लाइट १९ के गायब होने के पीछे एलियंस दवारा अपहरण किये जाने की घटना दिखाई गयी थी।  तो क्या सचमुच फ्लाइट 19 का एलियंस ने Abduct कर लिया था या फिर वह किसी वर्म होल की पर दूसरे डायमेंशन में चला गया ? देखते रहिये आज सारे राज़ खुल जाएंगे। आगे जानते हैं विश्व के जाने माने पैरानॉर्मल विशेषज्ञों और एलियन बीलीवर्स का बरमूडा ट्रायंगल और वहां होने वाली Disapperences के बारे में क्या मान्यता  है।

The Paranormal Explanation

The Lost City Of Atlantis

जो पहली मान्यता है वह लॉस्ट सिटी ऑफ़ अटलांटिस के इर्द गिर्द घूमती है।  अटलांटिस एक प्राचीन शहर था जिसका विज्ञान और सभ्यता काफी उन्नत थे। अटलांटिस के होने की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन लोक कथाओ की माने तो अटलांटिस आज भी अंध महासागर में कहीं दफन है और शायद उसी शहर के ऊपर है बरमूडा ट्रायंगल।  मान्यता है की अटलांटिस शहर की ही कोई प्राचीन तकनीक की वजह से बरमूडा ट्रायंगल भूल भुलैया बन चूका है जो शायद दुश्मन से बचाव के रूप में वहां स्थापित की गयी होगी।  इस मत को सहयता देता है Bahamas Island जो की बरमूडा ट्राइंगल क्षेत्र में आता है वहां “बिमिनी रोड” का मिलना।  बिमिनी रोड प्राचीन अटलांटिस का हिस्सा थी।  तो क्या बरमूडा ट्रायंगल लॉस्ट सिटी ऑफ़ अटलांटिस के ऊपर है? बिमिनी रोड मिली तो है लेकिन कुछ साइंटिस्ट का मानना है की यह अटलांटिस वासियों दवारा नहीं बनायीं गयी बल्कि एक प्रकृति संरचना है।

Secret Alien Base

कुछ एलियन बिलीवर्स का ये मत है की एलियंस पृथ्वी पे कई सदियों से हैं और उनका बेस बरमूडा पर है।  एलियंस ही वहां से गुजरने वाले जहाज़ों और यात्रियों को अगवा कर ले जाते है ताकि उन पर एक्सपेरिमेंट्स कर सकें ज्यादा जान सकें, मानव सभ्यता के बारे में। एलियन बिलिवर्स की मानें तो Flight 19 की घटना एक बड़े Alien Abudction की वारदात थी।   हालाँकि ज्यादातर घटनाओं के पीछे का रहस्य आज तक आधिकारिक रूप से नहीं सुलझ पाया है।  सरकारें बरमूडा ट्रायंगल में होने वाली दुर्घटनाओं को प्राकृतिक मानती है  लेकिन इस पर एलियन बिलिवर्स कहना है की सरकारें जानती है बरमूडा एक एलियन बेस है इसीलिए उन्होंने इसे विश्व के नक़्शे पर ही जगह नहीं दी है।  बरमूडा ट्राइंगल के रहस्य को दबाया जा रहा है।  इस बात को न पूरी तरीके से नाकारा जा सकता है और न ही पूरी तरीके से माना जा सकता है।  क्योंकि सबूत दोनों पक्षों की तरफ से देने होंगे जो अभी इनमे से किसी के पास नहीं है।

Portal of Time & Space

कुछ लोगों की मान्यता है की बरमूडा में स्पेस टाइम में एक छेद है।  इस छेद से दूसरी डायमेंशन या कह लें दूसरी दुनिया का रास्ता जाता है।  जो जहाज़ बरमूडा में रास्ता भटक जाता है इस छेद से दूसरी दुनिया या शायद भूत या भविष्य में चला जाता है  और यही कारण है की किसी भी दुर्घटना में SOS यानी मदद की गुहार लगाने वाले डिस्ट्रेस सिग्नल का उपयोग किया ही नहीं गया और न हीं कभी किसी भी दुर्घटना में मलबा या शव मिले ।

तो क्या Bermuda Triangle में कोई  अनदेखी अनजानी शक्ति है जिसे हमारा विज्ञान आज तक समझ नहीं सका है ? क्या बरमूडा ट्रायंगल एलियंस का मिलिट्री बेस है ? कहा जाता है की किसी भी घटना को लेकर या तो मान्यताएं होतीं है या वैज्ञानिक कारण।  मान्यताएँ प्रमाण नहीं माँगती लेकिन विज्ञान बिना तथ्यों और सबूतों के अपना फैसला नहीं सुनाता।

Science Finally Reveals The Secret Of Bermuda Triangle

भ्रम और वास्तविकता — Myth और रियलिटी  जब इन दोनों शब्दों के बीच दव्दं होता है तो विज्ञान हमेशा वास्तविकता का साथ देता है Reality का साथ देता है।     भ्रम को तोडना मुश्किल जरूर होता है लेकिन विज्ञान के सामने भ्रम की क्या बिसात।  अगर हम आपसे कहेंगे की बरमूडा ट्रायंगल की मिस्ट्री जैसी कोई चीज़ ही नहीं तो आप शायद नहीं मानेंगे।  लेकिन आज जो खुलासा हम करने जा रहें है उसके बाद आपकी सोच भी बरमूडा ट्रायंगल को लेकर बदल जाएगी।

अगर हम आपसे कहें की बरमूडा ट्रायंगल दुनिया के सबसे व्यस्ततम शिपिंग लेन्स में से एक है तो शायद आप सोच में पड़ जायेंगे।  पर ये एक सच्चाई है।

जी हाँ अमेरिका , यूरोप और कैरेबियाई आइलैंड के पोर्ट्स तक पहुँचने के लिए , लगातार , साल के 365 दिन, शिप्स, प्राइवेट याटस , कमर्शियल और प्राइवेट प्लेन्स सभी बरमूडा ट्रायंगल नामक इस मिथक से होकर गुजरतें हैं वह भी बिना गुम हुए । Lawrence David Kusche जिन्होंने The Bermuda Triangle Mystery: Solved (1975) नामक किताब लिखी थी वह बरमूडा ट्रायंगल में होने वाली दुर्घटनाओं को बेहद सामान्य मानते हैं। Lawrence David Kusche का मत है की औसतन बरमूडा ट्रायंगल में उतनी ही घटनाएं हुईं हैं जितनी दुनिया की किसी भी समुद्री इलाके में होती है।

तो क्या बरमूडा ट्रायंगल सनसनीखेज़ या कह लें सेंसेशनल राइटिंग द्वारा रचित एक फिक्शन मात्र है ? एक बात तो साफ है जितनी भी फ़िल्में ,टीवी शो, मैगज़ींस या अखबारों ने ऐसी हेडलाइंस लिखीं की, “जो भी बरमूडा ट्रायंगल से गुज़रा वह कभी वापस नहीं आया ” ये सिर्फ और सिर्फ सनसनी फ़ैलाने और लोगों की क्यूरोसिटी जगा कर चवन्नी कमाने वालों का ही काम है। जिसमे गलत रिपोर्टिंग तथ्यों के साथ मन मुताबिक छेड़खानी व सत्यापित या वेरीफाई किये जाने वाले सबूतों की मदद ली गयी है।  60s और 70s के दशक में फैलायी गयी बरमूडा ट्रायंगल की मिस्ट्री में सत्यता शुन्य है, और अगर कुछ है तो सिर्फ भ्रम। और इसे आज हम साबित करेंगे।

कंपास का दिशा भ्रम

विज्ञान फंतासी या हॉरर फिल्मों में अक्सर आपने देखा होगा। करैक्टर अपना दिशा सूचक कंपास चेक करता है उसे कांटा पेंडुलम की तरह दिशा चेंज करता हुआ दिखाई देता है और अगर सिचुएशन ज्यादा क्रिटिकल हो तो नीडल पूरी गति से गोल गोल घूमने लगती है। अब यहाँ हमें बताने की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं की ये ईशारा, किस ओर है।  इन फिल्मों ने हमारे मानस पटल में ये अवधारणा बना दी है की जहाँ पारलौकिक शक्तियां होंगी, जहाँ एलियंस होंगे वहां कंपास कभी सही रीडिंग नहीं बताएगा।  पर ये अवधारणा सरासर गलत है।  बरमूडा ट्रायंगल में भी लगतार कंपास की रीडिंग एक सी नहीं होती चेंज होती रहतीं हैं पर इसका मतलब ये नहीं की वहां कोई अदृश्य शक्ति है।  ये एक बेहद सामान्य नेविगेशनल त्रुटि है जिसे मैग्नेटिक वेरिएशन कहा जाता है। जिसकी जानकारी नाविकों और पायलटों को सदियों से है।  जी हाँ पृथ्वी में ऐसी बहुत कम जगहें हैं जहाँ मैग्नेटिक नार्थ (या कोई भी दिशा ) और जिओग्रफ़िकल नार्थ पर्फेक्ट एलाइनमेंट में होतें हैं।  कंपास हमेशा पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड के हिसाब से चलता है सो अगर हमें नार्थ डायरेक्शन की रीडिंग  मिल रही है तो वह मैग्नेटिक नार्थ होगा न की असल जिओग्रफ़िकल नार्थ।  इस त्रुटि की जानकारी और समाधान दोनों हमारे नाविकों ने सदियों पहले ही खोज लिया था। जिससे वे अपनी वर्तमान लोकेशन के आधार पर मैग्नेटिक पोल की स्थिति से असल जिओग्रफ़िकल पोल की स्थिति ज्ञात कर लिया करते थे ।    तो बरमूडा ट्रायंगल पर कंपास के काँटे की दिशा बदलते रहने का मतलब पैरानॉर्मल एक्टिविटी का होना क़तई नहीं है।

Gulf Stream

Gulf Stream पानी का वह Current यानी की बहाव है जो मेक्सिको की खाड़ी से शुरू होता है और फ्लोरिडा की तटीय सीमा से होते हुए अटलांटिक में विलीन हो जाता है। ये क्षेत्र बरमूडा ट्रायंगल में ही आता है।   Gulf Stream जैसे समुद्री बहाव या Oceanic Current महासागर के अंदर तेज़ बहाव वाली नदी जैसे होतें हैं।   Gulf Stream 10,000 Km लम्बी दुनिया का सबसे लम्बा और तेज़ बहाव वाला करंट  है।  अब इस वैज्ञानिक जानकारी को केंद्र में रख कर ,एक बार फिर से बरमूडा ट्राइंगल की उन Strange Disapperences के बारे में सोचिये।  ज्यादातर कैसेज़ में दुर्घटना ग्रस्त विमान या जहाज़ का मलबा तक नहीं मिल पता था और इसके पीछे सीधा कारण था दुनिया का सबसे लम्बा और तेज़ सामुद्रिक बहाव The Gulf Stream. बहुत साधारण एक्सप्लनेशन है Flight 19 नेविगेशनल दिक्कतों के चलते रास्ता भटकता है और खुले समुद्र में आगे बढ़ता है ईंधन ख़तम होने पे उन्हें समुद्र की सतह पर क्रैश  पड़ती है।  जहाँ युद्धक विमानों का ये बेड़ा क्रैश करता है वह जगह ठीक Gulf Stream के तेज़ बहाव वाले क्षेत्र में होती है।  तो अब सोचिये 10,000 km लम्बा ये तेज़ बहाव थोड़े ही समय में मलबे को क्रैश साइट से बहुत दूर कहीं और विस्थापित कर समुद्र में दफन नहीं कर गया होगा। यही वास्तविक कारण है क्यों बरमूडा ट्रायंगल से गुम हो चुके जहाज़ों का मलबा तक नहीं मिल पाता था।

Air Bombs

बरमूडा ट्रायंगल क्षेत्र में समुद्री तूफानों या Hurricanes का बनना आम बात है। इस वीडियो में आप देख सकतें हैं बरमूडा ट्रायंगल को पार करते हुए इस जहाज़ को कई मीटर लम्बी लहरों का सामना करते हुए।  हिंसक मौसम एक बहुत बड़ा कारण है जो समुद्री इलाकों को दुर्घटना जन्य बना देता है।  गहरा समुद्र होने की वजह से Rescue Operations या बचाव कार्य भी उतनी कुशलता से नहीं हो पाता जितना थलीय या ज़मीनी इलाकों में संभव होता है। हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने बरमूडा ट्रायंगल में होने वाले हिंसक मौसमी बदलावों का अध्यन किया जिससे एक चौकाने वाला खुलासा हुआ। वैज्ञानिकों को अटलांटिक महासागर के ऊपर  हेक्सागोनल आकर के यानी 6 कोनों वाले बादल मिले ।  जिनसे टकरा कर बहने वाले हवा ठंडी हो जाती थी। चूंकिं ठंडी हवाएँ भारी होतीं हैं तो वह नीचे की ओर Atlantic Sea की सतह तक आती थी।  चूँकि ये पूरा क्षेत्र उष्णकटिबंदी या Tropical जोन में पड़ता है इसलिए यहाँ तापमान ज्यादा होता है और बहने वाली हवाएं भी गर्म होती।  यहाँ हमें तेज़ी आगे बढ़ रही गल्फ स्ट्रीम को नहीं भूलना है जिसका पानी वाष्पीकृत हो गर्म हवा में मिल जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया जब हेक्सागोनल बादल अटलांटिक की गर्म आबोहवा के ऊपर छाते हैं तो उनसे हो कर आने वाली ठंडी हवा अचानक से बहाव को प्रभावित करती है. बरमूडा ट्रायंगल के रास्ते लगातार सफर करने वालो का  कहना है की जब मौसम ख़राब होता है तो अचानक हवाएं अपनी दिशा बदलती है और गति भी बढ़ जाती है।  ये असल में हेक्सागोनल क्लाउड्स से आने वाली ठंडी हवाएं होती है जो समंदर की सतह के समीप गर्म और रिक्त  स्थान को भरने के लिए तेज़ी से नीचे आती।  एक चक्रवात सा बन जाता है जिसमे समंदर का पानी भी हवा में कई मीटर तक उठ सकता है।  इसे वैज्ञानिकों ने नाम दिया एयर बॉम्ब्स। अब लगने में ये किसी साइंस फिक्शन मूवी का सीन लगे लेकिन ये पूरी तरह से प्रकृतिक होता है।   आपको एलेन ऑस्टिन शीप के पास से गुजरने वाला वह बेनाम वीरान जहाज़ तो याद है न, जिस पर दो बार क्रू मेंबर सवार हुए और दोनों बार गायब हो गए थे।  अगर आपने ध्यान दिया हो तो आपको याद होगा ये तभी हुआ जब मौसम ख़राब होने लगा. हो सकता है उस वक्त उस बेनाम शिप से ऐसा ही कोई एयर बम टकराया हो और पल भर में क्रू को बहा ले गया हो शिप को अकेला तैरता छोड़। एक शोध के अनुसार इस बात की पुष्टि हुई है की बरमूडा क्षेत्र में 70 प्रतिशत घटनाएं हिंसक मौसम की वजह से हुईं। किसी  सुपरनैचरल ताकत की वजह से नहीं.

Methane Hydrates

Methane Hydrate एक दुर्लभ रासायनिक कम्पाउंड है जिसमे Methane gas पानी के Crystalline फॉर्म में कैद होती है। वैज्ञानिकों का मत था की ऐसा कंपाउंड सिर्फ  हमारे सौर मंडल के बाहरी ऑर्बिट वाले ग्रहों पर पाया जाता होगा।  जहाँ पानी बर्फ के रूप में उपस्थित हो। हाल ही में रिसर्च में पाया गया की Methane Hydrate पृथ्वी के महासागरों की तलहटी में भी पाया जाता है।  ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च टीम ने पाया की इस प्राकृतिक रूप से दुर्लभ रसायन के प्रचुर बन्दर अटलांटिक महासागर के तल में हैं।  यही नहीं रिसर्चेर्स ने ये भी बताया की समुद्र के तल में होने वाली जियोलाजिकल हलचल जैसे की ज्वालामुखी या  भूकंप की स्थिति में  Methane Hydrate  के क्रिस्टल टूट जातें है और एक सफ़ेद झाग सा बना देतें है ऐसा इस लिए होता है क्योंकि क्रिस्टल फार्मेशन के टूटने से मीथेन गैस पानी में रिलीज़ हो जाती है।  जब ऐसा होता है तो पानी की डेंसिटी यानी घनत्व कम हो जाता है।  जिससे उस जलीय क्षेत्र की Buoyancy ख़तम हो जाती है और हम सब ये जानते है की पानी की  Buoyancy की वजह से ही चीज़े पानी पे तैर सकती हैं।  अगर Buoyancy न हो तो पानी में उतरने वाली हर चीज़ डूब जाएगी और फिर Gulf Stream का तेज़ बहाव उस चीज़ को कहाँ से कहाँ विस्थापित कर दे इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। आप लोगों को Flight 19 का किस्सा तो याद है न जिसमे आखिरी रेडियो सिग्नल भेजते हुए कप्तान टेलर ने क्या कहा था।   “We are entering white water, nothing seems right. We don’t know where we are, the water is green, no white.” अब कयास लगाने वालों और सनसनी बेचने वालों ने इसका ये निष्कर्ष निकल लिया की फ्लाइट 19 किसी वर्महोल या टाइम पोर्टल में प्रवेश कर गएँ है जहाँ का पानी सफ़ेद है प्लस पायलट की बेचैनी इस बात को बहुत हद तक believable भी बना देती है। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं परे है हो सकता है की उस दिन अटलांटिक सागर की तलहटी में कोई जियोलाजिकल उथल उथल हुई हो जिसकी वजह से Methane Hydrate क्रिस्टल्स में मौजूद मीथेन गैस बड़ी मात्रा में रिसि हो और समुद्र की सतह में सफ़ेद झाग सा बना दिया हो जो की पालक झपकते ही संभव है।   पायलट का आखिरी मैसेज एक बार फिर दोहराइये अब “We don’t know where we are, the water is green, no white” .

दोस्तों मानव जाती मान्यताओं और किवदंतियों की बेड़ियों से कैद थी, है और रहेगी ये सिर्फ साइंस ही है विज्ञानं ही है जो हमें इस मानसिक कैद से आज़ाद कर सकता है। 2013 में  the World Wide Fund for Nature ने दुनिया की 10 सबसे खतरनाक वाटर बॉडीज की लिस्ट जारी की जहाँ शिपिंग करना  खतरनाक है और इस लिस्ट में Bermuda Triangle का नामो निशां नहीं है।  दुनिया का कोई भी देश और कोई भी आधिकारिक नक़्शे पे BermudaTriangle का ज़िक्र नहीं है।  Bermuda Triangle उतना ही सहीं है जितनी कोई परीकथा।  तो आज के बाद अपना मूल्यवान समय इसके रहस्य को जानने में व्यर्थ न गवाएं।  ज्ञान बढ़ाये नॉलेज बढ़ाएं।

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