डेरिनकोयु का रहस्य : प्राचीन काल के खोये हुए भूमिगत शहरों का जटिल तंत्र

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सन १९६३ में Omer Demir नामक खोज करता ने एक एक्सपीडिशन के दौरान टर्की के Cappadocia कसबे के करीब एक बहोत गहरे छेद को देखा।  ज़मीन पर बना ये छेद किसी आम गुफा का मुहाना नहीं लग रहा था।  उन्होंने छेद के अंदर प्रवेश कर निरिक्षण करने का मन बना लिया।  जब Omer Demir ने उस छेद के अंदर झाँका उन्हें एक रास्ता दिखा जो बहुत ही खड़ी ढलान लिए हुए था। 

वे उस रास्ते के सहारे उतरते गए।  काफी गहराई में उतरने के बाद उन्हें अहसास हुआ की ये ज़मीनी छेद प्राकृतिक तौर पर नहीं बना है बल्कि मानव निर्मित है।  थोड़ा और नीचे उतरने पर जो उन्हें दिखाई दिया वह चौंका देने वाला था। उन्होंने प्राचीन काल के खोये हुए भूमिगत शहरों के जटिल तंत्र की खोज की थी। …..और उन्होंने इसे तुर्की भाषा में नाम दियाडेरिनकोयुअर्थात “Deep Hole” यागहरा छेद   

उस गहरे छेद के अंदर अंतहीन सुरंगों का जाल था जो १३ मालों की बड़ी बड़ी गुफाओं के काम्प्लेक्स को आपस में जोड़ रहा था।  हर गुफा नुमा कक्ष एक लम्बी लंबवत Vertical सुरंग से जुड़ी थी जिससे शुद्ध हवा बाहरी वातावरण से हर कक्ष तक आती थी और शीतलता को भी बनाये रखती थी।  इन लंबवत Vertical सुरंगों का तंत्र एयर कंडीशनिंग का काम कर रहे थे। 

Omer Demir ये अनुभव कर दंग रह गए की १३ माले के भूमिगत शहर की सबसे निचली या कहा जाए गहरे माले पे भी उतनी ही हवा पहुँच रही थी जितनी पहले माले पे। आज के युग में ज़मीन से २९० फ़ीट नीचे बिना किसी आधुनिक उपकरण के ये संभव ही नहीं। आने वाले एक्सपीडिशनस ,उत्खननों और रिसर्च से ये ज्ञात हुआ की ये एक अकेला शहर नहीं था इस प्राचीन बिल्डिंग काम्प्लेक्स से जुडी एक सुरंग   मील  बाद एक और भूमिगत नगरी से जुड़ी थी। 

रिसर्च से ये प्रमाणित हुआ की इस छेद के नीचे ३६ भूमिगत प्राचीन नगरों का जाल है जो लाख से १० लाख लोगों को शरण देने की क्षमता रखता है। इन अंडरग्राउंड सिटीज में अस्तबल से लेकर , लाइब्रेरी , अनाज के भंडारण के लिए गोदाम , तेल निकालने का कक्ष , क्लासरूम , CHURCH और मदिरा बनाने तक की व्यवस्था थी।  रिसर्च स्कॉलर्स ने ये अनुमान लगाया है की डेरिनकोयु अल्पकालिक शरणार्थी शिविर नहीं हो सकता था जो की बाहरी आक्रमणकारियों से बचने के लिए बनाया गया हो।  ये लम्बे समय तक लोगों को आवास उपलब्ध कराने की क्षमता रखता था संभवतः दशकों तक एक पूरी सभ्यता वहां बस सकती थी।

Turkish Department of Culture के हिसाब से डेरिनकोयु   8th–7th centuries BCE बनाया गया होगा लेकिन कुछ प्राचीन कलाकृतियाँ जो इन भूमिगत शहरों में मिली उनके कार्बन १४ डेटिंग सिस्टम के अनुसार 5th Century BCE की भी थी।  डेरिनकोयु के बारे में जो बात आज भी रहस्य बनी हुयी है वह ये है की आखिर किसी सभ्यता को इतनी वृहद् भूमिगत शहरों की क्यों ज़रुरत पड़ी ? इसपे तुर्की के रिसर्चर्स ने कई थेओरियाँ दीं।  पहली थी बाहरी आक्रमणकारियों के वजह से , पर ये साबित कर पाना कठिन था।  कारण ये था की अगर इतने विशाल स्तर पर खुदाई की जाए तो सतह पर मलबे के पहाड़ बन जाएंगे और आक्रमणकारी भाँप लेंगे। 

दूसरा कारण जो इस थ्योरी को नकार रहा था वह ये था की उस प्राचीन कालखंड के सबसे उन्नत औज़ारों के इस्तेमाल के बाद भी शहरों का इतना बड़ा तंत्र कई दशकों या शायद सदियों में बनाना संभव होगा।  दूसरी थ्योरी के अनुसार प्राचीन तुर्कों की किवदंती के अनुसार उनके देवता ने उन्हें आने वाले हिम युग की जानकारी दी थी जिससे बचने के लिए डेरिनकोयु का निर्माण किया गया   किसी भी थ्योरी को वैज्ञानिक तौर पर साक्ष्यों समेत साबित कर पाना लगभग असंभव है।  हो सकता है हम कभी भी नहीं जान पाएं की इन भूमिगत शहरों के नेटवर्क के निर्माण की वजह क्या थी पर इससे भी बड़ा रहस्य यह है की इन्हे बनाया कैसे गया होगा ?    

तुर्की के जिस Cappadocia कसबे में डेरिनकोयु मिला है उस क्षेत्र की मिटटी और पत्थर बहोत मुलायम है।  ऐसे में ज़मीन से २९० फ़ीट नीचे सुरँगों का जाल और कक्ष बनाना खतरे से खाली नहीं हो सकता।  पत्थर और मिटटी की ऐसी प्रकृति होने पे पुरे भूमिगत शहरों के तंत्र के ढहने की प्रबल संभावना बनती है। फिर भी अरबों टन वज़न को इस भूमिगत तंत्र ने बखूबी सहा है और आज भी मज़बूत बना हुआ है जो की प्राचीन काल के उन्नत आर्किटेक्चरल इंजीनिरिंग के कौशल को दर्शाता है। 

रहसयमय  तथ्य यह है की इस किस्म के औज़ार उस कालखंड के तुर्कों तो क्या …..पुरे प्राचीन विश्व में किसी के पास नहीं थे।  फिर यह भूमिगत तंत्र बनाया कैसे गया होगा? कौन थे वह लोग जिन्होने प्राचीन काल की इतिहास की सबसे जटिल भूमिगत सँरचना को बनाया ? किसने  डेरिन कोयु के उन्नत परिसंचरण तंत्र को बनाया ? ये रहस्य आज भी पहेली  बन कर रह गए है। आज डेरिन्कोयु आम जनता के लिए टूरिस्ट स्पॉट बन चूका है।  तो ये थी डेरिन कोयु की कहानी जिसे आज भी पूरी तरह सुलझाया नहीं जा सका है। 

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