अमेरिका पृथ्वी को कृत्रिम रिंग से घेर चूका है

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ring of earth

क्या आप जानतें है अमेरिका ने दो प्रयास किये थे पृथ्वी को एक मानव निर्मित रिंग से घेरने के लिए ?

लेख के अंत में देखें वीडियो

शायद नहीं आज का यह वीडियो आपको मनुष्य की सबसे बड़ी अंतरिक्षीय भूल के बारे में बतायेगा , जो शायद एक बहुत बड़ी त्रासदी भी हो सकती थी।  

दोस्तों आपने अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध के दौरान रहीं तल्खियों के बारे में टेलीविज़न और इंटरनेट पर ज़रूर देखा और सुना होगा। आप लोगों को बताना चाहेंगे की उस दौर में एक ऐसा भी वक़्त आया था जब अमेरिका को इस बात का डर सताता था, की रूस उस पर अचानक घात लगाकर हमला कर सकता है। ये सुनिश्चित करने के लिए की अमेरिका हमले की खबर अपने मित्र राष्ट्रों का न दे पाए, रूस, अमेरिका के संचार माध्यमों को नष्ट कर सकता था। उस दौर में किसी देश के संचार माध्यमों का नष्ट होने का मतलब था सीधा पराजित होना।  न तो अमेरिका की फौजी टुकड़ियां आपस में सूचना का आदान प्रदान कर पातीं और न मित्र राष्ट्रों को भनक लगती और मदद आ पाती।

१९६० के दशक में संचार संसाधन सीमित थे। रेडियो, माइक्रोवेव व समुद्र तल के नीचे बिछाई गयी भूमिगत केबल पर ही संचार व्यवस्था निर्भर थी।  अमेरिका को खौफ था की रूस हमले से पहले समुद्र तल में बिछे सारे अमेरिकी भूमिगत केबल काट सकता है । जबकि रेडियो संचार माध्यम का  सुचारु रूप से काम करना कई प्राकृतिक कारकों पर निर्भर था।  ख़राब मौसम , सौर उथल पुथल और कई अनजाने कारणों से रेडियो संपर्क बाधित हो सकता था।  यही अमेरिकी भय कारण बना मानव की पहली अंतरिक्षीय भूल का।  

अमेरिकी एजेंसी नासा ने संचार व्यवस्था को सुदृण करने के के लिए प्रोजेक्ट वेस्ट फोर्ड शुरू किया।  दरअसल रेडियो और माइक्रोवेव संचार हमारे वायुमंडल की ऊपरी परत “आयनोस्फियर” में “आयनस” की मात्रा पे निर्भर करता है।  जितने  अधिक “आयनस”, “आयनोस्फियर” में होंगे उतना ही ताकतवर रेडियो सिग्नल होगा ।  

इसके इसके लिए नासा ने एक तरकीब निकाली। नासा ने पृथ्वी को आयनोस्फियर के स्तर पर एक छल्ले से घेरने का खाका तैयार किया।  पृथ्वी को  घेरने वाली ये कृत्रिम रिंग लाखों महीन ताबें के तारों से बननी थी।

 ये ताँबे के तार, आयनोस्फियर की रेडियो तरंगों को परावर्तित करने की क्षमता बढ़ाने वाले थे, और तब प्राकृतिक बाधाएँ भी रेडियो संचार में रोड़ा नहीं बन पातीं। चूँकि प्रक्षेपण के बाद इस “Artificial ring of earth” से निकलने वाला सन्देश सबसे पहले अमेरिका के वेस्टफोर्ड में स्थित संचार सिस्टम को मिलना था इसलिए इस ऑपरेशन का नाम प्रोजेक्ट वेस्ट फोर्ड रखा गया।

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 नासा ने पहला प्रक्षेपण किया १९६१ में।  नेप्थलीन बॉल्स यानि डामर की गोलियों में ताँबे के 1.2 से.मी. लम्बे ,बाल से बारीक करोड़ों तारों को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा गया। डामर गोलियां वाष्पीकृत होती हैं और अंतरिक्ष में और अधिक तीव्रता से होतीं हैं जिससे ताँबे के तारों को फैलने में मदद मिलती।  पर १९६१ में भेजा गया पहला बैच फ़ैल हो गया और तार आयनोस्फियर में अच्छे से फैलने की बजाये गुच्छे बन कर रह गए।  और इस तरह मानवों ने अंतरिक्ष को भी अंतरिक्षीय कबाड़ से प्रदूषित करना शुरू किया । ख़ैर …. १९६१ के मिशन में नासा से एक बड़ी चूक हो गयी थी।  नासा ने चूँकि सिर्फ एक प्रक्षेपण में ही तांबें के तारों का पेलोड भर दिया था इसलिए या मिशन फ़ैल हुआ।  १९६३ में एक बार फिर नासा ने कोशिश की इस बार कई छोटे छोटे सिलेंडर्स में इन तारों को प्रक्षेपित किया गया।  इस बार नासा को सफलता हासिल हुई और पृथ्वी को एक ताँबे की आर्टिफीसियल रिंग मिली।  ये सब सिर्फ संचार माध्यम को सुचारु रूप से चलाने के लिए हुआ था।  साथ ही रूस को शीत युद्ध में पठखनी देने की अमेरिकी हेकड़ी भी पूरी हो चुकी थी।  पुरे विश्व के वैज्ञानिकों ने प्रबल विरोध किया, नासा के इस मिशन का और अमेरिका से पूछा गया की उन्हें किसने अधिकार दिया अंतरिक्ष को प्रदूषित करने का।  

ring of earth

ये अंतरिक्षीय कबाड़ आज भी पृथ्वी के चक्कर काट रहा है।  जिसकी फोटो ग्राफ नासा समय समय पर अब प्रकाशित करता है।  क्योंकि ये कबाड़ किसी भी वर्तमान सेटेलाइट और स्पेस शटल को क्षति पहुँचाने में सक्षम है।  बहरहाल ६० के दशक में ही कुछ सालों बाद सेटेलाइटस का अविष्कार हो गया, जो संचार क्रांति में एक बड़ी खोज थी। चूँकि सेटेलाइट्स की क्षमता इस मानव निर्मित ताँबे की रिंग से कहीं ज्यादा परिष्कृत थी और साथ ही चहुँ ओर अमेरिका अपने इस स्वार्थी कदम की वजह से आलोचना का शिकार हो रहा था इसलिए प्रोजेक्ट वेस्ट फोर्ड को बंद कर दिया गया।  चूँकि तांबें के तार काफी हलके थे, तो समय के साथ जो तार पृथ्वी की ओर गिरे वह वायुमंडल में जल नहीं पाए और पृथ्वी के ध्रुवों में गिरे.जिन्हे आज भी पाया जा सकता है।  वहीँ प्रोजेक्ट वेस्ट फोर्ड की इस मैनमेड रिंग का बहुत बड़ा भाग अब भी बाकी अंतरिक्षीय कबाड़ों के साथ पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है।  

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